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Bullish bearish Weekly report . गेहूं सरसों सोयाबीन चना

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bullish bearish Weekly report / किसान भाइयों इस पोस्ट में सभी फसलों की साप्ताहिक तेजी मंदी रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। जिसमें सरसों चना गेहूं तुवर मूंग उड़द काबुली चना मटर तेजी मंदी रिपोर्ट उपलब्ध करवायेंगें। रोजाना अपनी मंडी के भाव सबसे पहले और सबसे स्टीक, वायदा बाजार भाव और फसलों की तेजी मंदी रिपोर्ट पाने के लिए हमारी वेबसाइट पर जरूर विजीट करें ।

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साप्ताहिक तेजी मंदी रिपोर्ट, bullish bearish Weekly report, तेजी मंदी रिपोर्ट

गेहूं तेजी मंदी रिपोर्ट

पिछले सप्ताह शुरुवात सोमवार दिल्ली गेहूँ-2340 रुपये पर खुला था ओर शनिवार शाम दिल्ली गेहूँ-2415/20 रुपये पर बंद हुआ, बीते सप्ताह के दौरान गेहूँ मे मांग बनी रहने से +80 रुपए प्रति कुंटल मजबूत दर्ज हुआ,निचले भाव पर खरीद बढने के साथ आवक कमजोर के कारण सप्ताह भर में गेहूं के दाम 75/100 रुपये क्विंटल बढ़ चुके हैं। इस माह मंडियों में 18 मई तक करीब 30 लाख टन गेहूं की आवक हुई है, जबकि पिछले महीने 119 लाख टन आवक हुई है। इस महीने के बचे 13 दिनों में पिछले महीने जितनी आवक के लिए 90 लाख टन गेहूं की आवक होना मुश्किल है। चालू माह मंडियों में गेहूं की आवक कमजोर पड़ी है। आवक कमजोर पडने से गेहूं की कीमतों में तेजी आई है। इसके आलावा गेंहू की सरकारी खरीद भी तय लक्ष्य से पिछड़ती नजर आ रही है। किन्तु ज्ञात हो केन्द्र सरकार ने घरेलू प्रभाग में गेहूं,आटा एवं अन्य गेहूं उत्पादों की कीमतों में होने वाली किसी भी बढ़ोत्तरी को नियंत्रित करने के उद्देश्य से खुले बाजार में अपने स्टॉक से प्रत्येक तिमाही के दौरान गेहूं की बिक्री आरंभ करने का निर्णय लिया हुआ है। जो की जुलाई-23 से होने की सम्भावना है। यदि प्रत्येक तिमाही के दौरान सरकारी गेहूं का स्टॉक खुले बाजार में उतरता रहा तो इसकी आपूर्ति उपलब्धता की स्थिति बेहतर बनी रहेगी और कीमतों में तेजी की संभावना को ब्रेक लगेगा। हालांकि सरकार बेमौसम बारिश के कारण हुए नुकसान को दरकिनार कर ज्यादा गेहूं पैदा होने का दावा कर रही है, लेकिन व्यापारिक अनुमान के अनुसार इस वर्ष पैदावार कम है। इसलिए आगे गेहूं और महंगा हो सकता है। अल्प समय में दिल्ली भाव 2,500/50 रुपये क्विंटल तक भी जा सकते हैं।

सरसों तेजी मंदी रिपोर्ट

पिछले सप्ताह शुरुवात सोमवार जयपुर सरसों 5200 रुपये पर खुला था। ओर शनिवार शाम 5200 रुपये पर बंद हुआ। पिछले सप्ताह के दौरान उठा-पटक के साथ प्लांट बालो की मांग सिमित रहने से स्थिर दर्ज हुआ, विदेशी बाज़ारों में गिरावट के बावजूद सरसो तेल में बीते सप्ताह 2-3 रुपये / किलो की बढ़त दर्ज की गयी। खल की मांग में भी सुधार देखने को मिला जिसके चलते खल के भाव 40-50 क्विंटल तक बढे। निर्यात मांग मजबूत रहने से अप्रैल महीने में भारत ने 2.46 लाख टन। सरसो डोसी निर्यात किया। जयपुर सरसो सिमित घट बढ़ के बाद। इस सप्ताह लगभग स्थिर बंद हुआ। वहीं सलोनी के भाव में बीते सप्ताह 100 रुपये/ क्विंटल की बढ़त दर्ज की गयी। सरसो के भाव मंडियों में एमएसपी से काफी निचे हैं फिर भी सरकारी खरीदारी धीमी है। 19 मई तक नाफेड ने 5.84 लाख टन सरसो ही ख़रीदा है। नाफेड की खरीदारी 10 से 12 लाख टन के बीच सिमट सकती है। ख़रीदे हुए स्टॉक को बाद में नाफेड कीमतों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल करेगी। विदेशों से सस्ता विदेशी तेल का बड़ी मात्रा में आयात के चलते प्रोसेसर्स ऊँचे भाव में सरसो पकड़ने से बच रहे हैं। विदेशों में तेलों की पर्याप्त सप्लाई और घरेलु बाजार में खाद्य तेलों के ऊँचे स्टॉक के कारण सरसो की क्रशिंग कमजोर। अगले 10-15 दिन लिए सरसो के भाव निचे में 100-150 और ऊपर 200-250 के बीच व्यापार करने का अनुमान ।

सोयाबीन तेजी मंदी रिपोर्ट

पिछले सप्ताह शुरुवात सोमवार महाराष्ट्र सोलापुर 5320 रुपये पर खुला था ओर शनिवार शाम 5220 रुपये पर बंद हुआ। पिछले सप्ताह के दौरान प्लांट बालो की मांग कमजोर रहने से सोयाबीन में बीते सप्ताह -100 रूपये प्रति कुन्टल गिरावट दर्ज हुआ,वैश्विक बाजारों में गिरावट और प्लांटों की कमजोर मांग से सोयाबीन में गिरावट जारी। बीते सप्ताह सोयाबीन प्लांट डीलीवरी भाव में औसतन 100-150 रुपये की गिरावट दर्ज की गयी। अमेरिका और ब्राज़ील में उत्पादन बढ़ने तथा आयातक देशों के पास पर्याप्त सप्लाई से सोयाबीन में दबाव दिखा। USDA द्वारा अमेरिका के सोयाबीन उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी और चीन की मांग कमजोर पड़ने से सीबीओटी सोयाबीन में 8.90% की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गयी। किसान प्लांट्स और स्कॉकिस्ट के पास मई के शुरुआत में 64.88 लाख टन सोयाबीन उपलब्ध है। 10 लाख टन की औसत क्रशिंग भी पकड़ें तो अगले 5 महीने के लिए स्टॉक पर्याप्त से अधिक है और कैर्री फॉरवर्ड भी हो जाएगा। भारत ने अप्रैल महीने में 1.28 लाख टन सोयाबीन का आयात किया। सोया तेल की कीमतों में गिरावट और पर्याप्त सप्लाई के चलते सोयाबीन में बड़ी तेजी की उम्मीद धूमिल होती जा रही है। सोया डीओसी निर्यात अप्रैल महीने में 1.77 लाख टन हुआ जो मार्च की तुलना में घटा है। ब्राज़ील अर्जेंटीना और अमेरिकी सोया डीओसी की तुलना में भारतीय सोया डीओसी के भाव ऊँचे हैं। ऐसे में आने वाले महीनो में अब सोया डीओसी का निर्यात मांग भी कमजोर पड़ेगा। मानसून में देरी और बुवाई के बाद मौसम की चाल खराब होने पर ही सोयाबीन में कोई सुधार देखने को मिलेगी। सोया तेल में कमजोरी डीओसी की मांग घटने के अनुमान और पर्याप्त स्टॉक के चलते अगले 10-15 दिनों में सोयाबीन में 150-200 से ज्यादा की बढ़त की उम्मीद नहीं ।

चना तेजी मंदी रिपोर्ट

पिछले सप्ताह शुरुआत सोमवार दिल्ली राजस्थान लाइन नया 5075 रुपये पर खुला था और शनिवार शाम चना 5050/75 रुपये पर बंद हुआ। बीते सप्ताह के दौरान चना दाल बेसन में मांग सिमित रहने से मिलाजुला दर्ज हुआ,चना दाल में मांग कुछ सप्ताह से औसत बताया जा रहा। दिल्ली चना पिछले 2-3 माह से 5000-5400 की रेंज में कारोबार कर रहा है। प्रदेश में चना उत्पादन पिछले साल से कम है। नाफेड को अधिक चना मिलने का कारण मंडी में एमएसपी से निचे होना है भाव नाफेड ने अब तक 20.59 लाख टन चना खरीदी कर लिया है। दरअसल मटर आयात खुलने से अफवाह और अन्य दालों पर सरकारी सख्ती के कारण चना पर दबाव दिखा। मंडियों में चना की आवक अब धीरे धीरे कमजोर पड़ रही है। इस साल मिलर्स को मंडियों से साल भर चना मिलना मुश्किल होगा। इसके दो कारण एक कुल उत्पादन का बड़ा हिंसा नाफेड के पास गया दूसरा अब तक जो चना आया उसमे से अधिकतर खपत और फिर स्टॉक में गया। जून के बाद से घरेलु चना की सप्लाई टाइट होने की उम्मीद हालांकि भविष्य में नाफेड की चना बिक्री निति कैसी रहेगी उसपर चना भविष्य तय है। चना वर्तमान भाव में जोखिम नहीं और रोलिंग का व्यापार करना बेहतर।

मसूर तेजी मंदी रिपोर्ट

पिछला सप्ताह सुरुवात सोमवार कटनी मसूर 5875 रुपये पर खुला था ओर शनिवार 6000 रुपये पर बंद हुआ बीते सप्ताह के दौरान मसूर व मसूर दाल मे मांग बनी रहने से +125 रूपये प्रति कुंटल की मजबूत दर्ज हुआ। कृषि बाजार भाव सर्विस में हमने कटनी मसूर 5800 के भाव पर 6000 का लक्ष्य दिया था जो प्राप्त हुआ। मांग में सुधार और धीमी आवक के कारण मसूर के दाम में सुधार दर्ज किया गया। NCCF द्वारा मंडी से बफर स्टॉक के लिए खरीदी होने से भी मसूर में मजबूती। जानकारों के अनुसार तुवर में तेजी के कारण मसूर की खपत मांग धीरे धीरे बढ़ रही। जानकारों के अनुसार मसूर की खपत आने वाले महीनों में सामान्य से अधिक होने की उम्मीद। मध्य प्रदेश में मसूर के दाम ऊंचा होने से दिल्ली की तरफ आवक कमजोर है। इसबीच जानकारी है की सरकार ने राज्यों को कल्याणकारी योजनाओ में तुवर दाल की बजाय मसूर या चना को शामिल किया जाये। कृषि बाजार भाव सर्विस में हमारा मानना है की कटनी मसूर 5750 के निचे ही मंदी और ऊपर 6200 की रेंज।

तुवर तेजी मंदी रिपोर्ट

पिछले सप्ताह शुरुआत सोमवार अकोला तुुवर नयी मारूति 9150 रुपये पर खुला था ओर शनिवार शाम 9600 रुपये पर बंद हुआ। बीते सप्ताह के दौरान अकोला तुवर दाल मे मांग बनी रहने से +450 रूपये प्रति कुन्टल मजबूत दर्ज हुआ। कृषि बाजार भाव सर्विस दिया गया तुवर में लगभग सभी लक्ष्य प्राप्त हो चुका है। पिछले सप्ताह भी तुवर बाजार में अच्छी खासी मजबूती दर्ज की गई तुवर में मजबूती का प्रमुख कारण तमिलनाडु तुवर दाल टेंडर रहा। तुवर,तुवर दाल में मांग औसत है, लेकिन टाइट सप्लाई से मजबूती तमिलनाडु तुवर दाल टेंडर के कारण अफ्रीका तुवर सबसे अधिक तेज हुआ। सरकार द्वारा तुवर की तेजी को रोकने के उपाय काम नहीं कर रहे चूँकि मामला सप्लाई-डिमांड में अंतर का है। इसलिए बाहरी प्रयास काम नहीं कर रहे। बर्मा और घरेलु बाजार में स्टॉक कम है: जबकि अफ्रीका तुवर सितम्बर/अक्टूबर से अच्छे प्रेशर में आने की उम्मीद इसबीच सरकार की तरफ से आयातकों को 30 दिन से अधिक तुवर स्टॉक बेचने का आदेश दिया। तुवर अब 100 रुपये के करीब है। और तुवर दाल 135-138 प्रति किलो चूँकि भाव 3-4 वर्षों में सबसे ऊँचे स्तर पर है तो जोखिम बढ़ने से मांग घटेगा। सामने मॉनसून,ऊँचे भाव और कड़े सरकारी कदम की संभावना को देखते हुए। तुवर में मुनाफा लेने में समझदारी इस वर्ष तुवर की बोआई 8-10% बढ़ने की उम्मीद है। अगले माह जून में सरकार खरीफ एमएसपी घोषित करेगी सप्लाई डिमांड को देखते हुए तुवर का फंडामेंटल मजबूत है। तुवर का भविष्य मॉनसून,सरकारी निति पर अब पूरी तरफ निर्भर। घरेलु तुवर आने के लिए अभी 6-7 माह है ऐसे में आगे की राह काफी कठिन रहने की उम्मीद। हालांकि सप्ताह के अंत में दाम स्थिर से कुछ कमजोर हुए है। हालांकि इसमें कोई दोराय नहीं है की यहां से बाजार थोड़ा करेक्शन के बाद फिर बढ़ जायेगा।

काबुली चना तेजी मंदी रिपोर्ट

पिछले सप्ताह सप्ताह शुरुआत सोमवार इंदौर काबुली (40/42) 12,400 रुपये पर खुला था और शनिवार शाम (40/42) 12,600 रुपये पर बंद हुआ। बीते सप्ताह के दौरान काबुली चना मे मांग निकलने से +200 रूपये कुन्टल मजबूत दर्ज हुआ। काबुली के दाम में पिछले सप्ताह स्थिर से मजबूत रुख दर्ज किया गया। काबुली में मांग सामान्य या सामान्य से अच्छा ही रहा। मध्य प्रदेश में काबुली की आवक दिन प्रति दिन कमजोर पड़ रही है। मंडियों में आवक कमजोर लेकिन सामान्य मांग की पूर्ति के लिए काफी आने वाले सप्ताह में निर्यात मांग में वृद्धि देखने को मिल सकता है। जानकारों के अनुसार इस साल हलके-मीडियम क्वालिटी अधिक है। और बोल्ड क्वालिटी की काफी कमी है। अंतराष्ट्रीय बाजार में भी बोल्ड क्वालिटी काबुली का स्टॉक कमजोर है। और भाव भी ऊँचे है। भारतीय काबुली का निर्यात इस सीजन बेहतर रहने की उम्मीद दिग्गज कारोबारी जाता रहे हैं। कृषि बाजार भाव सर्विस में हमारा मानना है की काबुली में 11700 के निचे कमजोरी; जबकि 12900 के ऊपर तेजी। विदेशों में फसल और निर्यात बढने की उम्मीद को देखते हुए काबुली का भविष्य उज्वल रह सकता है।

उड़द तेजी मंदी रिपोर्ट

पिछले सप्ताह सुरुवात सोमवार चेन्नई एसक्यू 8750 रुपये पर खुला था ओर शनिवार शाम एसक्यू 8850 रुपये पर बंद हुआ बीते सप्ताह के दौरान उडद मे मांग बनी रहने से +100 रुपए प्रति कुंटल मजबूत दर्ज हुआ,बर्मा से उड़द के आयात की सुस्त रफ़्तार के कारण कमजोर स्टॉक के कारण उड़द बाजार में मजबूती दर्ज की गई। बर्मा में कारोबारी उड़द पर मजबूत पकड़ बनाकर भाव बढ़ा रहे पिछले सप्ताह बर्मा में उड़द का दाम में 10 डॉलर की मजबूती रही। बर्मा में तेजी,धीमा आयात और कमजोर घरेलु स्टॉक से चेन्नई उड़द में 125 रुपये से अधिक की तेजी दर्ज की गई। भारत में कमजोर स्टॉक को देखते हुए बर्मा के कारोबारी इसका अधिक से अधिक फायदा उठाने में लगे हुए है। बर्मा में अभी 4-5 लाख टन उड़द स्टॉक है। लेकिन मजबूत हाथों में होने से बिकवाली कमजोर। भारत सरकार ने हाल ही बर्मा के निर्यातकों का चेतावनी देते हुए सहयोग करने की बात कही। यदि बर्मा के कारोबारियों ने उड़द निर्यात नहीं बढ़ाया तो भारत सरकार कड़े फैसले भी ले सकती है। इसबीच ग्रीष्मकालीन उड़द की आवक मध्य प्रदेश-गुजरात में शुरू हो गई और जल्द ही आवक में सुधार होगा। ग्रीष्मकालीन उड़द से घरेलू मांग की पूर्ति कुछ हद तक हो पायेगी लेकिन काफी नहीं। यदि बर्मा से प्रति माह 50,000 टन से अधिक उड़द आयात हो सके तभी तेजी पर कुछ लगाम लग सकती है। उड़द का फंडामेंटल मजबूत है लेकिन सरकार के अगले कदम और नीतियों पर भविष्य निर्भर।

मूंग तेजी मंदी रिपोर्ट

पिछला सप्ताह सुरुवात सोमवार दिल्ली बेस्ट मूंग राजस्थान लाईन 3 KG 8100 रुपये पर खुला था ओर शनिवार शाम 3KG 7600/50 रूपये पर बंद हुआ बीते सप्ताह के दौरान मूंग में मांग कमजोर बनी रहने से -450 प्रति कुंटल गिरावट दर्ज हुआ। कृषि बाजार भाव सर्विस की मूंग में खरीदी से दूर रहने और भाव में कमजोरी की सलाह रही सही। मूंग की आवक में वृद्धि और दालों में सुस्त मांग से कमर्जारी ग्रीष्मकालीन मूंग की आवक मध्य,प्रदेश,गुजरात और अन्य राज्यों में बढ़ रही है ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल इस साल सभी राज्यों में अच्छी है। मध्य प्रदेश में इस साल ग्रीष्मकालीन फसल पिछले साल से अच्छी होने का अनुमान। नाफेड बल्क टेंडर तो निकाला लेकिन कम भाव में नहीं पास किया। सामने ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल की आवक और सरकार बिक्री से भाव पर दबाव रह सकता है। इस साल मध्य प्रदेश में चुनाव होने है। इसलिए राज्य सरकार एमएसपी भाव 7755 रूपए पर अच्छी खरीदी कर सकती है। जानकारों के अनुसार ग्रीष्मकालीन मुंग 6800-7200 की रेंज में सपोर्ट ले सकता है।

मटर तेजी मंदी रिपोर्ट

पिछले सप्ताह सुरुवात सोमवार कानपुर मटर-4225/4325 रुपये पर खुला था ओर शनिवार शाम कानपुर मटर 4300/4400 रुपये पर बंद हुआ, बीते सप्ताह के दौरान मटर मे मांग बनी रहने से +75 रुपए प्रति कुंटल मजबूत दर्ज हुआ,बिकवाली कमजोर पड़ने व लिवाली बढ़ने से चालू सप्ताह के दौरान मटर की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गयी। उत्पादक मंडियों में आवक कमजोर पड़ने व स्टाकिस्टों की लिवाली बढ़ने से मटर की बढ़ती कीमतों को समर्थन मिला। ललितपुर मटर में भी इस साप्ताह 75/100 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी देखी गयी। मांग बनी रहने से उरई मटर भी 100 रुपए प्रति क्विंटल तेजी देखी। मांग सामान्य बनी रहने से महोबा मटर में इस साप्ताह को तेजी मंदी नहीं देखी गयी। इसी प्रकार कोंच व राठ मटर में भी इस साप्ताह कोई हल चल नहीं देखी गयी और भाव सप्ताहांत में रुके रहे। मटर का उत्पादन इस बार गत वर्ष की अपेक्षा 40% कम बताया जा रहा है। दूसरी और सरकार द्वारा कनाडा ऑस्ट्रेलिया सहित विभिन्न देशों से आने वाले माल पर प्रतिबंध जारी है। एवं अभी तक आयात खोलने की कोई खबर नहीं है। मटर का स्टॉक ज्यादा नहीं है पुराना माल जो बचा था वह भी लगभग निबट चुका है। नए माल की आवक उत्पादक मंडियों में शुरू से ही इस बार कम रही है क्योंकि सकल उत्पादन में भारी कमी है। किसानों द्वारा इस बार सब्जियों में मटर के भाव ऊंचे होने से लगातार मटर की फली की बिकवाली की गई यही कारण है कि खेतों में पकने वाली मटर की उपलब्धि कम रही है। बाजार कुछ दिन ठहर कर और तेज़ होने का अनुमान है वर्तमान भाव में मटर का व्यापार लाभ दे जाएगा, अतः वर्तमान भाव में मटर का व्यापार करने में कोई जोखिम नहीं है।

व्यापार अपने विवेक से करें। लाभ हानि की हमारी कोई गारंटी नहीं होगी।

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